Breaking

Email Alert

..

Thursday, May 3, 2018

किरचॉफ का नियम




                                  Krichoff law



किरचॉफ  का नियम : किरचॉफ  विद्युत् धारा  से  सबंधित  दो नियम  दिए

प्रथम नियम (किरचॉफ का धारा का नियम )किसी विद्युत् परिपथ की किसी भी संधि पर मिलने वाली  समस्त विद्युत्  धाराओं  का बिजगणतीये योग  0  होता है

1.चिन्ह परिपाठी : संधि की  ओर  आने वाली सभी विद्युत् धाराओं  क धानतमक  लेते है और संधि से दूर जाने वाली विद्युत् धाराओं को ऋणात्मक  लेते है

2.किरचॉफ के धारा  के नियम की व्याख्या   : किरचॉफ का धारा  का नियम आवेश  संरछण  का नियम के अनुकूल  है 



I₁  और   I₂ संधि  की ओर  आने वाली धराये  है  उन्हें  धानतमक  लेते है  I₃ , I₄ तथा    I₅ संधि से दूर जाने वाली धराये  है उन्हें ऋणात्मक  लेते है

                                           I₁+I₂+I₃+I₄+I₅=0

                                        ∑I=0

दुतीये  नियम (किरचॉफ का  वोल्टेज का नियम ): किसी  विद्युत् परिपथ  के किसी  बंद जाल  के विभिन्न  भागों  में प्रवाहित  होने वाली विदुत  धाराओं  और उनके  संगत  प्रतिरोध  के गुणनफलो  का बीजगणितए  योग उस  जाल  में उपस्थित  समस्त  विदुत  वाहक  बलों  के बिजगणतीये  योग के बराबर  होता है

                                                    ∑ IR= ∑E

चिन्ह परिपाठी : धारा  की दिशा में चलने पर IR  को धनात्मक  लेते है और  धारा  की विपरीत  दिशा में IR   को ऋणात्मक  लेते है 
यदि  सेल के अन्दर  धन  से ऋण  सिर  की तरफ  चलने  तब विदुत  वाहक  बल E को ऋणात्मक लेते है और यदि ऋण से धन सिरे की तरफ चलते है तब E धनात्मक लेते है

किरचॉफ के धारा  के नियम की व्याख्या :

No comments:

Post a Comment

,

Blog Archive

SEO Score

Seo Score für tech24bit.blogspot.com

Followers