Thursday, May 3, 2018

Oersted Experiment



                         ओर्स्टेड का प्रयोग 












चुम्बक  एबं  विदुत  धारा  के बीच  सबंध  का अविष्कार  सन 1819  में हुआ  अपने एक व्याख़या  के दौरान  हेन्स  ओर्स्टेड  ने यह पाया की जब एक तार में से विदुत  धारा  प्रवाहित  की जाती है तो पास में रखी चुंबकीय  सुई   व्हिचपित  हो जाती है धारा  के मान को बढ़ाने  पर चुंबकीय  सुई  का विछप  भी बढ़  जाता  है  धारा  की दिशा बदलने पर व्हिचप  की दिशा भी बदल जाती है  ओर्स्टेड  ने एक चुम्बकीय  सुई  N-S को टेबिल  पर रखा तथा इसके ऊपर स्थित  एक तार PQ में से धारा  प्रवाहित  करने पर उन्होंने देखा  की

1. चुंबकीय  सुई  का उत्तरी धुव  पस्चिम  की और विचपित  हो  जाता  है धारा  P  से Q  की और प्रवाहित  की जाती है

2.  यदि धारा की दिशा को पलट  दिया जाये तो अब उत्तरी धुव  पूर्व दिशा की और व्हिचपित  हो जाता है

3. अगर  तार  को चुंबकीय सुई के नीचे  िस्थत  कर दिया जाये तो विछपित  हो जाता है



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